मेधा पाटेकर से जुड़े 10 रोचक तथ्य | 10 Interesting Facts About Medha Patekar - Tenfacts
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Friday, May 25, 2018

मेधा पाटेकर से जुड़े 10 रोचक तथ्य | 10 Interesting Facts About Medha Patekar

मेधा पाटेकर से जुड़े 10 रोचक तथ्य | 10 Interesting Facts About Medha Patekar

10 Interesting Facts About Medha Patekar

हेलो दोस्तों Tenfacts मे आपका स्वागत है। आज हम आपको मेधा पाटेकर की जिंदगी से जुड़े 10 रोचक तथ्य के बारे में बताएंगे, जो आप शायद ही जानते होंगे, तो आइए जानते हैं।

दुनिया मेंऐसे लोग बहुत ही कम होते हैं जो अपनी परेशानियों को छोड़कर दूसरों की परेशानियों के लिए लड़ते हैं। ऐसी ही हस्तियों में शामिल है ‘मेधा पाटकर’। वह एक ऐसी शख्सियत हैं जो आज भी लोगों को उनका हक दिलाने के लिए लड़ रही हैं। वह खुद के लिए नहीं है बल्कि उन लोगों के लिए लड़ रही है जिनकी सरकार नहीं सुन रही है। ये भारत की प्रसिद्ध समाज सेविका के रूप में जानी जाती हैं। इन्हें पूरी दुनिया में 'नर्मदा घाटी की आवाज़' के रूप में जाना जाता है।

गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित मेधा पाटकर ने 'सरदार सरोवर परियोजना' से प्रभावित होने वाले लगभग 37 हज़ार गाँवों के लोगों को अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ी है। उन्होंने महेश्वर बांध के विस्थापितों के आंदोलन का भी नेतृत्व किया। इन्‍हें राइट लाइवलीहुड अवार्ड, गोल्डमेन इनवायरमेंट अवार्ड, ग्रीन रिबन अवार्ड, मदर टेरेसा अवार्ड फॉर सोशल जस्टिस जैसे कई अवार्ड्स से सम्‍मानित किया गया हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं मेधा पाटकर से जुड़े 10 प्रमुख तथ्य।

1. मेधा पाटकर को लोग सोशल वर्कर कहते हैं, लेकिन वे सोशल वर्कर से काफी आगे हैं। उनका जन्म स्वतंत्रता सेनानी और मजदूर यूनियन लीडर वसंत खानोलकर के घर 1 दिसंबर 1954 को हुआ था। वह महाराष्ट्र के मुंबई में पैदा हुई थी और वहीं पली-बड़ी। उनकी मां भी एक सोशल वर्कर ही थी जिनसे उन्‍हें प्रेरणा मिली। इन्होंने अपनी पढ़ाई टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस से की थी।

2. पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने मन बनाया कि वह अब जो भी करेगी वह सिर्फ जनता की भलाई के लिए ही करेगी। उन्होंने शुरूआत में पांच साल मुंबई के स्लम ऐरिया में रहने वाले लोगों के लिए काम किया। इसके बाद उन्होंने तीन साल गुजरात के दलित लोगों के लिए काम किया।

3. इस बीच वे परिणय-सूत्र में बंधी, लेकिन उनका यह रिश्ता ज्‍यादा दिन तक नहीं टिक पाया और दोनों आपसी सहमति से अलग हो गए। मेधा पाटकर को लोग नर्मदा बचाओ आंदोलन के लिए जानते हैं।

4. कुछ महीनों पहले ही जब सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन किया गया था इससे पहले उन्होंने नर्मदा क्षेत्र में सरकार के खिलाफ आमरण अनशन किया था। यहां हालात कुछ ऐसे हो गए थे कि मेधा को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।

5. जहां मेधा पाटकर ने ये आंदोलन जहां किया था वहां उनकी लड़ाई उन सभी लोगों के लिए थी जिनके घर डूब प्रभावित क्षेत्र में जा रहे थे। वैसे मेधा पाटकर ने कई और आंदोलनों में भी हिस्सा लिया है लेकिन ख़ासतौर पर वे बांध से होने वाले नुकसान के खिलाफ काफी आंदोलनों में भाग लेती रही हैं।

6. हमेशा सूती साड़ी और हवाई चप्पल पहनने वाली मेधा यूं तो बहुत साधारण नजर आती हैं पर जब फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना शुरू करती हैं तो समझ आता है कि वह घाट की रहने वाली कोई साधारण महिला नहीं बल्कि एक ओजस्‍वी वक्‍ता हैं। जिनकी बातों में बहुत गहराई है। जब भाषण देती हैं तो वहां जमा होने वाली भीड़ को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी बातों का कितना असर घाटवासियों पर है। मेधा ने सामाजिक अध्ययन के क्षेत्र में गहन शोध किया है।

7. 1991 में 22 दिनों का अनशन करके वे लगभग मौत के मुंह में चली गई थीं। 1993 और 1994 में भी वे ऐसे लंबे उपवास कर चुकी हैं। इसके अलावा वे नर्मदा घाटी के लोगों के लिए कम से कम दस-ग्‍यारह बार जेल जा चुकी हैं। विश्व बैंक की बांध परियोजनाओं को खुली चुनौती देने वाली मेधा पाटकर को विश्व बैंक ने अपनी एक सलाहकार समिति का सदस्य बनाया है।

8. उन्होंने नर्मदा बचाओ आंदोलन ने कई रचनात्मक काम भी किए हैं। इनके संगठन ने बुनियादी शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल की स्थिति में सुधार के लिए काफ़ी काम किया है।

9. मेधा पाटकर ने भारत के सभी जनांदोलनों को एक दूसरे से जोड़ने की पहल भी की, इसके लिए इन्होंने एक नेटवर्क की शुरूआत की जिसका नाम है- नेशनल एलांयस फॉर पीपुल्स मूवमें।

10. इतने सालों मेधा पाटकर राजनीति से बिल्‍कुल दूर रहीं पर जनवरी 2014 में इन्‍होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन की थी। उस समय इनका सहयोग इनके आंदोलन में आम आदमी पार्टी ने भी किया था। पाटेकर ने साल 2014 में लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन इसमें वह हार गईं।

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