कैलाश सत्‍यार्थी से जुड़े 10 रोचक तथ्य | 10 Interesting Facts About Kailash Satyarthi - Tenfacts
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Friday, May 25, 2018

कैलाश सत्‍यार्थी से जुड़े 10 रोचक तथ्य | 10 Interesting Facts About Kailash Satyarthi

कैलाश सत्‍यार्थी से जुड़े 10 रोचक तथ्य | 10 Interesting Facts About Kailash Satyarthi

10 Interesting Facts About Kailash Satyarthi

हेलो दोस्तों Tenfacts मे आपका स्वागत है। आज हम आपको 'मैन ऑन ए मिशन' कैलाश सत्‍यार्थी से जुड़े 10 रोचक तथ्य के बारे में बताएंगे, जो शायद ही आप जानते होंगे, तो आइए जानते हैं।

वर्तमान दौर में फिल्म व क्रिकेट ऐसे दो क्षेत्र हैं, जिनके बारे में बड़ों से लेकर बच्चों तक को बहुत जानकारी है। इस लाइमलाइट से दूर एक आदमी ऐसा भी है जो लगभग तीस सालों से ज्‍यादा समय से बच्‍चों के हितों के लिए लड़ रहा है और उनके अधिकार उन्‍हें दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है।इस असली हीरो के बारे में लोग तभी जान पाते हैं जब उन्‍हें नोबल पुरस्‍कार मिलता है। हम बात कर रहे हैं बाल अधिकार कार्यकर्ता और बाल श्रम के खिलाफ जंग छेड़ने वाले कैलाश सत्‍यार्थी की।

उन्हें ''मैन ऑन ए मिशन'' भी कहा जाता है। साल 2014 में जब इन्‍हें बाल अएिकारों के लिए गए कार्यों के लिए नोबल मिला तो लोगों में इनके बारे में जानने की उत्‍सुकता बढ़ी पर आज इन सबके बावजूद भी बहुत कम लोग इनके बारे में जानते हैं। इन्‍हें नोबल से पहले और बाद में कई अवार्ड मिल चुके हैं। आज हम कैलाश सत्‍यार्थी के जीवन और उपलब्धियों के बारे में ऐसी बातें बताएंगे जो कि बहुत कम लोग जानते हैं।

1. भारत के मध्य प्रदेश के विदिशा में 11 जनवरी 1954 को जन्में कैलाश सत्यार्थी बचपन से ही जरततमंद बच्‍चों के प्रति संवेदनशील रहे हैं। जब ये 11 साल के थे तभी से इन्‍होंने अपने दोस्‍तों के साथ मिलकर मोहल्‍ले से इस्‍तेमाल की हुई किताबें इकट्ठी कर जरूरतमंद बच्‍चों में बांटने का काम शुरू कर दिया था।

2. 15 साल की उम्र में इन्‍होंने एक बार अपने दोस्‍तों के साथ मिलकर कम्‍यूनिटी डिनर का कार्यक्रम रखा जिसमें ऊंची जाति के लोगों, लीडर्स और राजनीति से जुड़े लोगों को बुलाया गया। इसमें दलित वर्ग के लोगों से खाना बनवाया गया था, लेकिन उंची जाति वालों ने खाने से इनकार कर दिया और इनके परिवार को बायकाट करने की कोशिश की। उसी से दुखी होकर इन्‍होंने अपने नाम से टाइटल हटा कर सत्‍यार्थी लगा लिया था।

3. वह पेशे से एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और लेक्‍चरर का काम करते थे, लेकिन उन्होंने 26 वर्ष की उम्र में ही करियर छोड़कर ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खिलाफ और बाल अधिकारों के लिए काम करना शुरू कर दिया था।

4. कैलाश सत्यार्थी ने वर्ष 1983 में बालश्रम के खिलाफ 'बचपन बचाओ आंदोलन' की स्थापना की। उनका यह संगठन अब तक 80,000 से ज़्यादा बच्चों को बंधुआ मजदूरी, मानव तस्करी और बालश्रम के चंगुल से मुक्त करा चुका है।

5. गैर-सरकारी संगठनों तथा कार्यकर्ताओं की सहायता से कैलाश सत्यार्थी ने हज़ारों ऐसी फैक्टि्रयों तथा गोदामों पर छापे पड़वाए। जिनमें बच्चों से काम करवाया जा रहा था। जब इनके साथ कोई नहीं होता था तो ये काम अकेले ही किया करते थे।

6. इन्‍होंने गंदी फैक्ट्रियों में गुलामों की तरह काम कर रही और सेक्‍सुअल असॉल्‍ट झेल रही कई महिलाओं का भी रेस्‍क्‍यू करने में मदद की है।

7. उन्होंने 'रगमार्क' की शुरूआत की, जो यह प्रमाणित करती है कि विदेशों में बेचे जाने वाले दरी, कालीन एवं कंबल जैसे उत्पादों में बाल श्रम का योगदान नहीं लिया गया है।

8. इस समय वह 'ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर' (बाल श्रम के ख़िलाफ़ वैश्विक अभियान) के अध्यक्ष भी हैं। बाल श्रमिकों को छुड़वाने के अपने अभियानों के तहत कई बार जब ये अकेले पड़ जाते थे तो बाल श्रम माफियाओं ने इन्‍हें शारीरिक चोट भी पहुंचाई। इनके दो साथियों की तो हत्‍या भी कर दी गई।

9. नरेन्‍द्र मोदी के प्रथानमंत्री बनने पर इन्‍होंने ट्वीट किया था कि एक चाय वाले बच्‍चे ने पीएम बनकर अपने निंदकों का मुंह बंद किया है, अब उनका कर्तव्‍य है कि वो अब किसी भी बच्‍चे को बाल श्रमिक न बनने दें। एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ-साथ ये बहुत अच्‍छे कुक भी हैं।

10. एक बार चोर उनके घर से नोबल का रेप्लिका अवार्ड और साथ में दूसरी मुल्‍यवान वस्‍तुएं भी चोरी कर ले गए थे, लेकिन बाद में पुलिस ने उन्हें बरामद कर लिया था।

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